महाराष्ट्र

तबीयत बिगड़ने पर इंडिगो पायलट ने उड़ान भरने से किया इनकार अनुमति मिलने के बाद लिया फैसला

Kavita2
11 Sept 2026 5:20 PM IST
तबीयत बिगड़ने पर इंडिगो पायलट ने उड़ान भरने से किया इनकार अनुमति मिलने के बाद लिया फैसला
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मुंबई। इंडिगो की एक उड़ान से पहले पायलट की तबीयत खराब होने का मामला सामने आया है। गुरुवार को पायलट ने अपनी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी एयरलाइन के मुख्यालय को ईमेल के माध्यम से दी और नियमानुसार छुट्टी की अनुमति मांगी। मुख्यालय से अनुमति मिलने के बाद ही पायलट ने विमान उड़ाने से इनकार किया। एयरलाइन अधिकारियों के अनुसार, पायलट ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए यह फैसला लिया था।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, संबंधित पायलट ने गुरुवार सुबह अपनी पहली उड़ान मुंबई से वाराणसी के बीच संचालित की थी। इस उड़ान के बाद उनकी तबीयत ठीक नहीं रही। इसके बाद उन्होंने अगली मुंबई उड़ान से पहले एयरलाइन मुख्यालय को अपनी अस्वस्थता के संबंध में ईमेल भेजा। पायलट ने ड्यूटी जारी रखने में असमर्थता जताते हुए छुट्टी मांगी। एयरलाइन की ओर से अनुमति दिए जाने के बाद उन्होंने आगे विमान उड़ाने से मना कर दिया।

इस मामले में महत्वपूर्ण बात यह है कि पायलट ने बिना सूचना दिए ड्यूटी छोड़ने या अचानक विमान उड़ाने से इनकार करने के बजाय एयरलाइन की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया। उन्होंने अपनी तबीयत के बारे में मुख्यालय को पहले ही जानकारी दी और अनुमति मिलने तक इंतजार किया। इसके बाद स्वास्थ्य तथा यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आगे की उड़ान नहीं संचालित करने का निर्णय लिया।

नागर विमानन महानिदेशालय यानी डीजीसीए के नियमों के अनुसार, विमान उड़ाने वाले पायलट का शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ रहना जरूरी है। यदि कोई पायलट स्वयं को उड़ान के लिए फिट नहीं मानता है तो उसे इसकी सूचना तत्काल एयरलाइन को देनी होती है। ऐसी स्थिति में एयरलाइन को संबंधित पायलट को ड्यूटी से हटाकर आराम या छुट्टी की अनुमति देनी चाहिए। इसका उद्देश्य किसी भी संभावित जोखिम को उड़ान शुरू होने से पहले ही समाप्त करना है।

नागरिक उड्डयन क्षेत्र में पायलट का स्वास्थ्य सीधे तौर पर विमान और उसमें सवार यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा होता है। विमान संचालन के दौरान पायलट को लगातार तकनीकी उपकरणों की निगरानी, मौसम की परिस्थितियों का आकलन, एयर ट्रैफिक कंट्रोल के साथ संवाद और जरूरी निर्णय लेने होते हैं। अस्वस्थता, अत्यधिक थकान, चक्कर, बुखार या किसी दवा के प्रभाव से पायलट की निर्णय क्षमता प्रभावित हो सकती है।

इसी कारण विमानन नियमों में पायलट की फिटनेस को अत्यंत गंभीरता से लिया जाता है। पायलटों को मेडिकल जांच की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है और ड्यूटी शुरू करने से पहले अपनी स्थिति का स्वयं भी आकलन करना होता है। यदि उन्हें लगता है कि उनकी शारीरिक या मानसिक स्थिति सुरक्षित उड़ान संचालन के अनुकूल नहीं है तो इसकी जानकारी संबंधित अधिकारी को देना उनकी जिम्मेदारी है।

एयरलाइन की भी यह जिम्मेदारी होती है कि वह अस्वस्थ पायलट पर उड़ान संचालित करने का दबाव न डाले। ऐसी स्थिति में वैकल्पिक चालक दल की व्यवस्था करना कंपनी के परिचालन प्रबंधन का हिस्सा होता है। हालांकि संबंधित उड़ान के लिए वैकल्पिक पायलट की व्यवस्था, संभावित देरी या अन्य परिचालन बदलाव के बारे में तत्काल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

एयरलाइंस अपने उड़ान कार्यक्रम को बनाए रखने के लिए विभिन्न हवाई अड्डों पर अतिरिक्त चालक दल की व्यवस्था रखती हैं। किसी पायलट या केबिन क्रू सदस्य के अचानक बीमार होने पर रिजर्व स्टाफ को ड्यूटी पर बुलाया जा सकता है। यदि समय पर वैकल्पिक चालक दल उपलब्ध नहीं होता तो उड़ान में देरी या उसके कार्यक्रम में परिवर्तन की स्थिति बन सकती है। ऐसे मामलों में यात्रियों को समय पर जानकारी देना आवश्यक माना जाता है।

पायलट द्वारा सुबह मुंबई से वाराणसी की उड़ान संचालित किए जाने के बाद स्वास्थ्य खराब होने की सूचना देने से यह सवाल भी उठ सकता है कि क्या पहली उड़ान के दौरान उन्हें किसी प्रकार की परेशानी महसूस हुई थी। हालांकि उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी तबीयत किस समय बिगड़ी और उन्हें किस प्रकार की स्वास्थ्य समस्या हुई। इसलिए इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

विमानन क्षेत्र में ‘फिट टू फ्लाई’ का सिद्धांत अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके तहत पायलट को केवल मेडिकल प्रमाणपत्र होना ही पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि प्रत्येक उड़ान से पहले उसका वास्तविक रूप से स्वस्थ और सतर्क होना भी जरूरी है। मेडिकल प्रमाणपत्र एक निश्चित अवधि के लिए जारी किया जाता है, लेकिन ड्यूटी वाले दिन अचानक बीमारी होने की स्थिति में पायलट को स्वयं इसकी घोषणा करनी होती है।

अंतरराष्ट्रीय विमानन मानकों में थकान प्रबंधन पर भी विशेष जोर दिया जाता है। लगातार उड़ानों, अनियमित समय, रात की ड्यूटी और समय क्षेत्रों में बदलाव के कारण पायलटों की नींद तथा शारीरिक क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसी कारण उनके उड़ान ड्यूटी समय और अनिवार्य विश्राम के संबंध में नियम बनाए गए हैं। स्वास्थ्य संबंधी सूचना मिलने पर उसका तत्काल समाधान करना इसी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है।

यात्रियों की नजर से उड़ान में अचानक बदलाव असुविधाजनक हो सकता है, लेकिन अस्वस्थ पायलट को विमान उड़ाने से रोकना सुरक्षा की दृष्टि से जरूरी है। विमान के प्रस्थान में देरी की तुलना में यात्रियों, चालक दल और विमान की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है। प्रशिक्षित और पूरी तरह स्वस्थ चालक दल के बिना उड़ान संचालित नहीं की जा सकती।

घटना के संबंध में पायलट द्वारा मुख्यालय को भेजे गए ईमेल और छुट्टी की अनुमति मिलने की समयसीमा महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे यह स्पष्ट होगा कि सूचना मिलने के बाद एयरलाइन ने कितनी जल्दी कार्रवाई की तथा वैकल्पिक व्यवस्था के लिए क्या कदम उठाए। फिलहाल एयरलाइन अधिकारियों ने इतना बताया है कि पायलट ने अपनी पहली उड़ान मुंबई से वाराणसी के बीच पूरी की थी और इसके बाद नियमानुसार छुट्टी मांगी थी।

इस घटना ने पायलटों की स्वास्थ्य सुरक्षा और एयरलाइंस की चालक दल प्रबंधन व्यवस्था को फिर चर्चा में ला दिया है। नागरिक उड्डयन उद्योग में समयबद्ध संचालन महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे ऊपर उड़ान सुरक्षा को रखा जाता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पायलट ने स्वास्थ्य संबंधी परेशानी की सूचना देकर निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया और मुख्यालय की अनुमति मिलने के बाद ही अगली उड़ान संचालित करने से इनकार किया।

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